बेरोजगारी की मार और आत्मसम्मान की जंग Movie

बेरोजगारी की मार और आत्मसम्मान की जंग Movie

बेरोजगारी की मार और आत्मसम्मान की जंग Movie

“बेरोजगारी की मार और आत्मसम्मान की जंग” एक फिल्म है जो भारतीय युवाओं की चुनौतियों को दिखाती है। यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। यह फिल्म सामाजिक मुद्दों को उजागर करती है और युवाओं को प्रेरित करती है।

बेरोजगारी की मार Movie In Hindi

मुख्य बिंदु

  • भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी
  • बेरोजगारी के सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण
  • संघर्ष और आत्मसम्मान की गहरी कहानी
  • फिल्म के माध्यम से सामाजिक जागरूकता
  • आधुनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित

बेरोजगारी की मार Movie In Hindi

“बेरोजगारी की मार” एक हिंदी फिल्म है जो दर्शकों को बेरोजगारी के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती है। यह फिल्म युवा पीढ़ी के सामने आने वाली चुनौतियों को स्पष्ट करती है। इसमें पात्र अपनी पहचान और सफलता की खोज में संघर्ष करते हैं।

समीक्षा के दौरान, यह स्पष्ट हुआ कि फिल्म में अभिनय, कहानी, और संदेश का संयोजन सफल है। दर्शक मनोरंजन के साथ-साथ गहरी सोच भी करते हैं। फिल्म दृश्यों और संवादों के माध्यम से बेरोजगारी की मार को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।

“बेरोजगारी की मार” एक फिल्म से अधिक है। यह सामाजिक मुद्दे पर चर्चा करने का एक माध्यम है। यह दर्शाती है कि बेरोजगारी कैसे लोगों के आत्म-सम्मान और भविष्य को प्रभावित करती है। इस प्रकार, यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।

कहानी की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

फिल्म की कहानी एक युवा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नौकरी की तलाश में है। वह अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करता है, लेकिन कई चुनौतियों का सामना करता है। बेरोजगारी के इस समय में, उसे पारिवारिक दबाव, आर्थिक संकट और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

ये स्थितियाँ उसे अपनी पहचान और आत्मसम्मान की खोज में मजबूर करती हैं।

इस कहानी से पता चलता है कि एक व्यक्ति का उद्देश्य आर्थिक तंगी से निपटना ही नहीं है। वह समाज में अपने स्थान को फिर से हासिल करना भी चाहता है। फिल्म यह दिखाती है कि बेरोजगारी एक समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक मुद्दा है। यह व्यक्ति के मनोबल और आत्मसम्मान को भी प्रभावित करता है।

मुख्य पात्रों का परिचय

इस फिल्म में कई महत्वपूर्ण पात्र हैं। युवा protagonist नौकरी की तलाश में संघर्ष करता है। उसके मित्र, परिवार के सदस्य और प्रतिस्पर्धी भी हैं, जो उसकी यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हर पात्र की कहानी समाज के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है। वे समाज के मुद्दों को उजागर करते हैं, जो आज की दुनिया में महत्वपूर्ण हैं। किरदारों की भूमिका इस फिल्म का दिल है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

इन किरदारों की व्यक्तिगत यात्रा दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाती है। लोग अपने जीवन के अनुभवों की तुलना करते हैं। वे वास्तविकता को समझने की कोशिश करते हैं।

बेरोजगारी का प्रभाव: भारतीय समाज पर नज़र

फिल्म बेरोजगारी को केवल एक व्यक्तिगत समस्या के रूप में नहीं दिखाती। यह सामाजिक मुद्दे के रूप में इसके व्यापक प्रभाव को विश्लेषित करती है। बेरोजगारी व्यक्तियों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। यह परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करती है।

लोगों के आत्मसम्मान पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आर्थिक अस्थिरता वाले परिवारों के लिए समाज में पहचान बनाना कठिन हो जाता है। फिल्म यह दिखाती है कि बेरोजगारी के बढ़ते स्तर से समाज का ढांचा डगमगाने लगता है। यह एक व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है, बल्कि एक सामाजिक समस्या है।

समाज में बेरोजगारी के कारण असहमति, तनाव और निराशा बढ़ जाते हैं। फिल्म यह दर्शाती है कि बेरोजगारी का प्रभाव नौकरी की कमी से परे है। यह पूरी पीढ़ी के सपनों को कुचलने की क्षमता रखती है।

फिल्म का संदेश और नैतिकता

फिल्म का संदेश आत्म-सम्मान की महत्वता और संघर्ष के प्रति समर्पित रहने का है। यह कहानी दर्शकों को प्रेरित करती है कि चाहे हालात कितने भी कठिन हों, व्यक्ति को अपनी मेहनत और क्षमताओं पर विश्वास करना चाहिए। फिल्म नैतिकता के महत्व पर भी जोर देती है, यह दिखाते हुए कि संघर्ष के माध्यम से हम अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।

इस प्रकार, दर्शक समझ जाते हैं कि सुख-सौभाग्य के लिए आत्म-सम्मान और नैतिकता कितनी महत्वपूर्ण है। प्रेरणा के माध्यम से, दर्शकों को यह एहसास होता है कि दुख और परेशानी के समय भी सकारात्मक दृष्टिकोण रखना आवश्यक है।

संघर्ष और आत्म-सम्मान: फिल्म का केंद्र बिंदु

फिल्म संघर्ष और आत्म-सम्मान पर केंद्रित है। यह पात्रों की यात्रा को दिखाती है जो असफलताओं के बावजूद अपने आत्म-सम्मान को बचाने की कोशिश करते हैं। उनकी यात्रा में कई बाधाएं आती हैं, जो दर्शकों को प्रेरित करती हैं।

पात्रों के संघर्ष उन्हें व्यक्तिगत रूप से मजबूत बनाते हैं। वे समाज में अपना स्थान बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। फिल्म आत्म-सम्मान के महत्व को भी दर्शाती है, जो हमें चुनौतियों का सामना करने का सिखाती है।

संघर्ष और आत्म-सम्मान की कहानी

इस फिल्म से दर्शकों को यह संदेश मिलता है कि कठिनाइयों के बावजूद, अपने आत्म-सम्मान को बनाए रखना जरूरी है। इस तरह, फिल्म संघर्ष और आत्म-सम्मान को एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में प्रस्तुत करती है।

फिल्म के निर्देशन और निर्माण की जानकारी

फिल्म “बेरोजगारी की मार” का निर्देशन एक प्रसिद्ध निर्देशक ने किया है। वे सामाजिक मुद्दों को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। उनकी दृष्टि इस फिल्म में स्पष्ट है, जिससे दर्शकों को गहराई से सोचने के लिए प्रेरित किया जाता है।

निर्माण की दिशा में, यह फिल्म एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस द्वारा प्रस्तुत की गई है। इसने फिल्म को विशेष रूप से बनाने का काम किया है। इस प्रोडक्शन हाउस की विश्वसनीयता और गुणवत्ता ने दर्शकों के बीच एक अच्छी छवि बनाई है।

संगीत और साउंडट्रैक का महत्व

फिल्म का संगीत कहानी को जीवंत बनाता है। यह दृश्यों को जीवंत करता है और दर्शकों की भावनाओं को छूता है। संगीतकार ने साउंडट्रैक के माध्यम से कई महत्वपूर्ण गाने बनाए हैं।

हर गाना फिल्म के सीन के साथ जुड़ता है। यह फिल्म की कहानी को गहराई से जोड़ता है।

फिल्म का संगीत दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। यह कहानी की जटिलताओं को समझने में मदद करता है। विभिन्न गानों की लय और बोल दर्शकों को पात्रों के साथ जुड़ाव महसूस कराते हैं।

इस प्रकार, साउंडट्रैक फिल्म के प्रभाव को बढ़ाता है। यह दर्शकों के अनुभव को समृद्ध बनाता है।

नकारात्मकता और सकारात्मकता का संतुलन

फिल्म में नकारात्मकता और सकारात्मकता का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है। यह संतुलन दर्शाता है कि जीवन में दोनों ही पहलू हैं। पात्रों की कठिनाइयां और संघर्ष नकारात्मकता का प्रतीक हैं। वहीं, उनके प्रयास और सफलता सकारात्मकता का प्रतीक है।

नकारात्मकता और सकारात्मकता का संतुलन

फिल्म में नकारात्मकता का प्रदर्शन समस्याओं की उपस्थिति को दर्शाता है। इसके विपरीत, पात्रों की सकारात्मकता से पता चलता है कि समस्याओं का सामना करने के लिए हिम्मत और संघर्ष आवश्यक है। यह संदेश देता है कि जीवन में दोनों ही भावनाएं हैं।

एक संतुलित जीवन जीने के लिए यह संतुलन आवश्यक है। यह दर्शाता है कि जीवन में खुशी और उदासी दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।

नकारात्मकता सकारात्मकता
संघर्ष और निराशा उम्मीद और प्रयास
बाधाएँ और कठिनाईयाँ सफलता और उपलब्धियाँ
असफलता का भय सकारात्मक दृष्टिकोण
निर्णय लेने में संकोच स्वविवेक और आत्मविश्वास

इस प्रकार, नकारात्मकता और सकारात्मकता का संतुलन दर्शकों को जीवन की वास्तविकता को समझाने में मदद करता है। यह उन्हें यह सिखाता है कि जीवन में कभी-कभी मुश्किलें आती हैं, लेकिन सकारात्मकता से हर समस्या का समाधान हो सकता है। यह एक प्रेरणा स्रोत है, जो लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।

फिल्म समीक्षाएँ और दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ

फिल्म समीक्षाएँ विभिन्न टीवी चैनलों, वेबसाइट्स और ब्लॉग्स पर उपलब्ध हैं। समीक्षकों ने कथानक और प्रदर्शन का विश्लेषण किया है। कुछ समीक्षाएँ इस फिल्म को अत्यधिक प्रेरणादायक मानती हैं।

वहीं, कुछ ने संवादों की आलोचना की है। दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ भी मिश्रित हैं। अनेक लोगों ने फिल्म की गंभीरता और विषय वस्तु की सराहना की है।

पात्रों के अभिनय ने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है। आलोचना में कुछ दर्शकों ने फिल्म के रुख को वर्तमान समाज के मुद्दों से जोड़ा है। यह इसे और भी प्रासंगिक बनाता है।

दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ फिल्म की गुणवत्ता और प्रभाव को प्रकट करती हैं।

सारांश में, आलोचनाएँ और प्रतिक्रियाएँ फिल्म के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण संदेश का वाहक बन गई है।

जनसामान्य पर फिल्म का प्रभाव

यह फिल्म मनोरंजन के अलावा, जनसामान्य पर गहरा प्रभाव डालती है। यह फिल्म बेरोजगारी जैसे गंभीर विषयों पर जागरूकता बढ़ाती है। दर्शक फिल्म से प्रेरित होकर अपनी जिंदगी में बदलाव लाने के लिए तैयार हो जाते हैं।

फिल्म समाज को दिखाती है कि बेरोजगारी व्यक्तियों के जीवन पर कैसे प्रभाव डालती है। दर्शक फिल्म देखकर बेरोजगारी के बारे चर्चा करते हैं। यह फिल्म लोगों को सामाजिक प्रभाव को समझने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करती है।

विषय जनसामान्य पर असर सामाजिक प्रभाव
जागरूकता बेरोजगारी की गंभीरता को समझना सामाजिक चर्चाएँ और सक्रियता बढ़ाना
प्रेरणा अपने करियर के लिए सकारात्मक कदम उठाना समाज में बदलाव की चाहत
समानता भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना सामान्य लोगों के अधिकारों की रक्षा करना

इस प्रकार, यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है। यह एक सशक्त सामाजिक टिप्पणी है जो जनसामान्य पर गहरा प्रभाव डालती है।

फिल्म के प्रमुख संवाद और उनकी गहराई

फिल्म में कुछ संवाद हैं जो दर्शकों के दिल में गहराई से बस जाते हैं। ये संवाद पात्रों की भावनाओं और संघर्षों को स्पष्ट करते हैं। संवाद न केवल कहानी को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि समाज के मुद्दों को भी उजागर करते हैं।

प्रत्येक संवाद का चयन बहुत सावधानी से किया गया है। दर्शकों की सोच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है। फिल्म के संवाद शब्दों से ज्यादा हैं, वे पात्रों के अंदर के युद्ध और आत्मा की गहराई को दर्शाते हैं।

संवाद की गहराई से पता चलता है कि मानवीय अनुभवों को कैसे व्यक्त किया जा सकता है। ये संवाद दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं। वे प्रश्न उठाते हैं और फिल्म के संदेश को समझने में मदद करते हैं।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में स्थान

बेरोजगारी ने भारतीय फिल्म उद्योग को विशेष स्थान दिया है। यह फिल्म सामाजिक मुद्दों को उजागर करती है। साथ ही, यह दर्शकों को ऐसे विषयों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है जो सामान्य रूप से अनदेखा किए जाते हैं।

फिल्म के माध्यम से दर्शाए गए संघर्ष और जीत ने इसकी महत्ता को और भी बढ़ाया है।

इस फिल्म ने एक नए ट्रेंड को शुरू किया है। अन्य फिल्म निर्माता भी अब सामाजिक मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। यह भारतीय फिल्म उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

फिल्म का नाम निर्देशक मुख्य विषय महत्व
बेरोजगारी की मार अज्ञात सामाजिक मुद्दे समाज में जागरूकता बढ़ाना
अनजान फिल्म 1 निर्देशक 1 रिश्तों पर ध्यान संस्कृतिक प्रतिबिंब
अनजान फिल्म 2 निर्देशक 2 परिवार के मुद्दे जीवन की कठिनाइयाँ

“बेरोजगारी की मार” ने भारतीय फिल्म उद्योग में एक नया स्थान बनाया है। यहाँ सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करना आवश्यक हो गया है।

फिल्म के प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया का प्रभाव

फिल्म के प्रदर्शन के समय, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर *काफी चर्चा* हुई। दर्शकों ने ट्विटर, फेसबुक, और इंस्टाग्राम का उपयोग अपने विचारों को साझा करने के लिए किया। यह प्लेटफार्म ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और फिल्म को युवाओं के बीच प्रमोट करने का एक महत्वपूर्ण साधन बना।

फिल्म का प्रचार सोशल मीडिया पर गतिविधियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया गया। प्रशंसकों ने अपनी पसंदीदा संवादों, गानों, और दृश्यों को साझा किया। इससे अन्य दर्शकों की रुचि बढ़ी, जिससे सिनेमा घरों में भीड़ बढ़ी।

सोशल मीडिया ने फिल्म के प्रमोशन को एक नया आयाम दिया। खासकर इन प्लेटफार्मों की विस्तृत पहुंच ने फिल्म को बड़े पैमाने पर चर्चा का मुद्दा बना दिया। यह दर्शकों के बीच फिल्म से संबंधित संवादों को प्राथमिकता देने का एक अवसर था। इससे न केवल उनकी *सोशल मीडिया प्रभाव* में वृद्धि हुई, बल्कि इंटरनेट पर फिल्म के बारे में विचारों का आदान-प्रदान भी सुनिश्चित हुआ।

बेरोजगारी और शिक्षा: गहरे संबंध

फिल्म में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि बेरोजगारी और शिक्षा के बीच गहरा संबंध है। अनेक पात्रों के अनुभवों से पता चलता है कि शिक्षा का अभाव बेरोजगारी को बढ़ाता है। जब लोगों के पास आवश्यक कौशल और ज्ञान नहीं होता, तो उन्हें नौकरी पाने में कठिनाइयाँ आती हैं।

शिक्षा का स्तर रोजगार के अवसरों से सीधे जुड़ा होता है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग आमतौर पर अधिक प्रतिस्पर्धी होते हैं। इसलिए, शिक्षा का विकास बेरोजगारी की समस्या का समाधान कर सकता है।

शिक्षा का स्तर बेरोजगारी की दर (%)
कक्षा 10 तक 30
कक्षा 12 तक 20
उच्च शिक्षा 10

इस फिल्म की कहानी शिक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। पात्रों की कठिनाइयों और उनकी यात्रा से पता चलता है कि शिक्षा नौकरी के अवसरों को कैसे बढ़ा सकती है।

 

फिल्म का तुलनात्मक अध्ययन अन्य फिल्मों से

फिल्म “बेरोजगारी की मार” को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखना आवश्यक है। यह फिल्म “रंग दे बसंती” और “चक दे! इंडिया” जैसी फिल्मों के साथ तुलना करती है। इन फिल्मों में समाज की त्रुटियों और चुनौतियों पर प्रकाश पड़ता है।

“रंग दे बसंती” युवा पीढ़ी की आजादी और संघर्ष को दर्शाती है। “चक दे! इंडिया” खेल और एकता के माध्यम से समाज में बदलाव की कोशिश करती है। “बेरोजगारी की मार” रोजगार और आत्म-सम्मान पर केंद्रित है, लेकिन अन्य फिल्मों के साथ जुड़ती है।

“बेरोजगारी की मार” का तुलनात्मक अध्ययन दर्शकों को जोड़ता है। विभिन्न फिल्मों के समान विषयों को पहचानकर, यह फिल्म एक नई दृष्टि प्रदान करती है।

फिल्म देखने के बाद की सोच

फिल्म देखने के बाद, दर्शकों में उत्साह और प्रेरणा की लहर फैल जाती है। यह फिल्म उनके भीतर विभिन्न विचार जगाती है। दर्शक अक्सर सोचते हैं कि वे अपनी जिंदगी में क्या बदलाव ला सकते हैं।

फिल्म के बाद, लोग यह सोचते हैं कि वे कैसे बेहतर निर्णय ले सकते हैं। यह फिल्म जिंदगी को एक नई प्रेरणा देती है। यह उन्हें कठिनाइयों का सामना करने के लिए हिम्मत देती है।

यह याद दिलाती है कि आवाज़ उठाना और अपने अधिकारों के लिए लड़ना महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

“बेरोजगारी की मार” एक महत्वपूर्ण फिल्म है जो समाज में बेरोजगारी के मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाती है। यह फिल्म भारतीय युवाओं के संघर्ष को उजागर करती है। इसके अलावा, यह आत्म-सम्मान और संघर्ष के महत्व पर गहराई से विचार करती है।

फिल्म का प्रभाव दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है। यह एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि आत्म-सम्मान के लिए कितनी मेहनत और संघर्ष की आवश्यकता होती है।

फिल्म का यह निष्कर्ष हमें प्रेरित करता है। यह हमें अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित करता है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।

इसे देखते हुए, यह स्पष्ट है कि “बेरोजगारी की मार” केवल मनोरंजन का साधन नहीं है। यह एक सोचने का विषय भी है, जो समाज में परिवर्तन लाने का बल प्रदान करता है।

इस फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया संदेश लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में गूंजता रहेगा। यह हमें इस बात की याद दिलाता है कि संघर्ष और आत्म-सम्मान महत्वपूर्ण हैं।

इस प्रकार, “बेरोजगारी की मार” दर्शकों के लिए एक जागरूकता का कारण बनती है। यह उसे एक यादगार फिल्म बना देती है।

FAQ

“बेरोजगारी की मार और आत्मसम्मान की जंग” फिल्म का मुख्य विषय क्या है?

यह फिल्म भारतीय युवाओं की बेरोजगारी की चुनौतियों को उजागर करती है। यह आत्म-सम्मान की खोज पर केंद्रित है।

फिल्म का निर्देशन किसने किया है?

“बेरोजगारी की मार” का निर्देशन एक अनुभवशील निर्देशक द्वारा किया गया है। यह निर्देशक सामाजिक मुद्दों पर संवेदनशीलता रखता है।

क्या फिल्म में कोई विशेष संगीत है?

हाँ, फिल्म का साउंडट्रैक भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। इसमें कई दिल छूने वाले गाने शामिल हैं।

इस फिल्म से कौन-सी महत्वपूर्ण सीख मिलती है?

फिल्म का मुख्य संदेश यह है कि कठिनाइयों का सामना करते समय व्यक्ति को अपने आत्म-सम्मान पर विश्वास करना चाहिए।

फिल्म की कहानियों का समाज पर क्या प्रभाव है?

“बेरोजगारी की मार” फिल्म समाज में बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर जागरूकता फैलाने में सफल रही है।

क्या “बेरोजगारी की मार” अन्य फिल्मों से अलग है?

इस फिल्म को सामाजिक मुद्दों को पेश करने के लिए जाना जाता है। यह “रंग दे बसंती” और “चक दे! इंडिया” की तुलना में विशेष है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया के बारे में क्या कहना है?

दर्शकों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कुछ इसे प्रेरणादायक मानते हैं, जबकि अन्य संवादों की आलोचना करते हैं।

फिल्म के प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका क्या थी?

फिल्म की रिलीज के समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बना। यह ने इसके प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्या इस फिल्म में शिक्षा का महत्व बताया गया है?

हाँ, फिल्म यह बताती है कि बेरोजगारी और शिक्षा का गहरा संबंध है। यह बताती है कि शिक्षा का अभाव बेरोजगारी का एक मुख्य कारण है।

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